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सूर्योदय

Monday, March 20, 2017

लोग

कुछ लोग
इकाई होकर
दहाई, सैकड़ा, हजार
दसहजार,लाख,दस लाख
का दम्भ भरते हैं
पर जनता उन्हें
इकाई से पहले
बायीं ओर का
शून्य समझती है।
इसलिए
महत्वपूर्ण मुद्दों पर
जनसरोकारों पर
उनके विचारों को
तुच्छ और न्यून
समझती है।

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