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सूर्योदय

Monday, March 16, 2015

ये कोहराम आम नहीं है

photo from google
आज नन्दनकानन का
ये कोहराम आम नहीं है,
यूँ ही काँव-काँव करना,
कोयलों का काम नहीं है॥
लगता है सच में रूठा है ऋतुराज,
बहार हो यहाँ से भगाया गया है।
काँटों का साज सजाकर उसे
बेबात यूँ ही रुलाया गया है॥
तभी कोयल की कूक आज
हूक बनी फिरती है।
कोयल भी स्वयं को
कौवों में गिनती है॥