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सूर्योदय

Monday, March 31, 2014

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर विशेष...

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा,
मंगलमय सर्वदा,
नूतन परिधान हो
निर्मल वितान हो
प्रकृति का शृंगार हो
दानवता का संहार हो
मानवता विजित हो
पशुता पराजित हो
सृष्टि-स्वस्ति भावना,
जन-जन में जाग्रत हो
लोभ-मोह त्यागें सब,
तम-निद्रा से जागे सब,
भेदभाव त्यागकर,
एक्य मार्ग पर चलें
भोगवाद छोड़कर,
सर्वे भवन्तु सुखिनः

कण्ठ-कण्ठ अब कहे

Sunday, March 23, 2014

वीर बलिदानियों को नमन...

जिनके बलिदानों से सिञ्चित
हमने पायी यह स्वतन्त्रता।
जिनके शब्दों से हृदय तक
बसती केवल भारतमाता॥
दुःशासनों से मुक्त कराने का
असिधारा व्रत जिसने धारा था।
भारतमाँ का वीरपूत वह
निज माँ के नयनों का तारा था॥
गहन निशा, प्रकाश न क्षण भर,
माँ का जीना प्रतिपल दूभर ।
आततायी-संहार हेतु तब
किया निज प्राण न्यौछावर ॥
भगतसिंह, सुखदेव, राजगुरु
ने देशहित बलिदान दिया।
माँ के कष्टों से मुक्ति हेतु
प्राणोत्सर्ग प्रयाण किया॥
लोहित शोणित के बिन्दु-बिन्दु में
बस भारतमाता बसी रहीं।
बनी वह विजयिनी पताका
शिंजिनी वीरों की कसी रही॥
खिंची प्रत्यंचा तनी भृकुटी ।
भारत को मुक्ति मिली ॥ 


Friday, March 7, 2014

स्त्रीशक्ति

महिला, स्त्री, पत्नी, जाया
तेरे नाम अनेक ।
स्नेह,  वात्सल्य, करुणा, ममता,
दया, त्याग, तप और समर्पण,
सबकी मूर्ति तू एक ।
तेरे नाम अनेक ।
श्रद्धा की देवी है तू पर
अज्ञानी शठ जान न पाते ।
शक्तिरूप साक्षात् है देवी!
शक्ति को पहचान न पाते ॥
तू जननी है, तू माता है,
तू ही पुत्री, तू ही भगिनी ॥
तू ही मुग्धा, तू ही प्रेयसी,
तू ही सृष्टिस्वरूपा पत्नी ॥
संबन्धों का तार तू ही है,
सम्बन्ध का आधार तू ही है ॥
सृष्टिचक्र, गमन-आगमन,
ब्रह्माण्ड तू ही, संसार तू ही है ।