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सूर्योदय

Saturday, December 6, 2014

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के सृजन एवं दर्शन शक्ति को विहंगम, विस्तृत फलक प्रदान करने एवं उसका राष्ट्रवन्दन-स्वरूप गढ़ने वाले शिल्पी प्रा. यशवन्तराव केलकर जी की पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धाञ्जलि में समर्पित कुछ पंक्तियाँ....
राष्ट्रहित जीवन समर्पित
समर्पित हर वन्दना।
ध्येय मार्ग का निरन्तर
गतिमान पथिक बना॥
राष्ट्र की सेवा-साधना,
मन में निज ठान ली थी।
स्नेह का हर बिन्दु अर्पित,
वर्तिका यह जानती थी।
स्नेह-सिंचित वाटिका यह
श्यामला हो पुलक तक ।
अनवरत संधान सज्जित
बढ़ेगी निज ध्येय पथपर॥
कर्मवीर श्रेष्ठ जीवन,
देशहित अनुराग देगा।
दीप की लौ मन्द हो न
वह निरन्तर आग देगा॥
भर रहा नित चेतना को,
संवेदनायें भी जागती हैं।
गढ़े एक सृजन पथ फिर
मन में वे ठानती हैं॥
आज परिषद्-पुण्यसलिला
नित-निरन्तर बह रही है।
ध्रुवतारा सी अटल वह,
राष्ट्रहित में नित खड़ी है॥
कर्मनिष्ठ की वह लगन जो
थी ध्येयनिष्ठा को समर्पित।
हम आज वही भाव लेकर,
कर रहे श्रद्धासुमन अर्पित
अनगिन पुष्प औ पराग सज्जित
सुरभित हो आज बढ़ रहे हम।
इस यशस्वी महापुरुष के,
साकार स्वप्न कर रहे हम॥
इस ऊर्जापुञ्ज की ऊर्जा
अजस्र हममें बह रही है।
इसी की यशोगाथा,
आज परिषद् कह रही है॥

2 comments:

रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

चर्चामंच परुवार की ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि।
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आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (08-12-2014) को "FDI की जरुरत भारत को नही है" (चर्चा-1821) पर भी होगी।
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सभी पाठकों को हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Kavita Rawat said...

प्रो. यशवन्तराव केलकर जी की पुण्यतिथि पर सुन्दर रचना प्रस्तुति हेतु धन्यवाद ...
केलकर जी की पुण्य तिथि पर सादर श्रद्धासुमन!