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सूर्योदय

Tuesday, May 27, 2014

ज्येष्ठ में वृष्टि...

वरुणदेव का मधुर हास।.
ज्येष्ठ मेँ श्रावण का आभास।।
रेणु रेणु अब सिक्त हुआ,
व्यथा-भार से मुक्त हुआ।
उदक उड़ेला तप्त धरा पर,
लिया कष्ट करुणा को हर हर।।

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