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सूर्योदय

Tuesday, May 27, 2014

सफलता का पहला प्रहर है।


आलोचना का स्वर मुखर है, 
दिवस मेँ सूरज प्रखर है।
अरुण की सप्तवर्णी रश्मियाँ सजाये।
सफलता का पहला प्रहर है।।

4 comments:

रविकर said...

आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति बुधवारीय चर्चा मंच पर ।।

Asha Saxena said...

बढ़िया लिखा है

Vaanbhatt said...

खूबसूरत अभिव्यक्ति...

आशा जोगळेकर said...

वाह और अब सफलता का सूरज प्रखर ही होता जायेगा।