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सूर्योदय

Wednesday, March 7, 2012

होली

आइये होलिका जलायें, प्रह्लाद बचायें ,

असत्य भार भस्मकर सत्य-ज्योति जलायें ।

मिटाकर आलस्य, जड़ता, क्लान्ति-श्रान्ति,

नव उमंग, नव-तरंग ले आगे कदम बढ़ायें ॥

सत्य का स्थापन हो, असत्य का समापन हो ।

मिलजुल रहें सब स्नेहमय अपनापन हो ॥

नवल का संधान हो, नूतन विहान हो ।

हर तान समवेत कर, बस फागुनी तान हो ॥

सप्तरंग वसुन्धरा, वसन्तमयी है धरा ।

तिक्तता त्याज्य हो, धैर्य धार्य मधुरा ॥

रंग-बिरंगी प्रकृति, मकरन्द मधुर महक रहा ।

कोयलिया कुहुँक रही, खगकुल चहँक रहा ॥

रंग-बिरंगा हृदय हो, रंग-बिरंगी भावनायें ।

जन-जन को होली की हार्दिक शुभकामनायें ॥

9 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
आपको सपरिवार होली की मंगलकामनाएँ!

चैतन्य शर्मा said...

होली की ढेर सारी शुभकामनायें आपको भी...

डॉ॰ मोनिका शर्मा said...

होली की शुभकामनाएँ...

Pallavi said...

आपको भी होली मुबारक हो ....

पी.एस .भाकुनी said...

रंग-बिरंगी प्रकृति, मकरन्द मधुर महक रहा ।
कोयलिया कुहुँक रही, खगकुल चहँक रहा ॥......बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
आपको सपरिवार होली की मंगलकामनाएँ!

नयना said...

bahut sundar

रंजना said...

मिलजुल रहें सब स्नेहमय अपनापन हो ॥नवल का संधान हो, नूतन विहान हो ।

ईश्वर करें, ऐसा ही हो....

बहुत ही सुन्दर, मनमोहक रचना रची आपने....

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

सुन्दर कामना, शुभकामनायें!

जयकृष्ण राय तुषार said...

उत्कृष्ट कविता ममता जी बधाई और शुभकामनाएँ |