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सूर्योदय

Monday, August 27, 2012

वर्षा


वन-कानन औ बाग बगीचे,
निज अपने जल से है सींचे ।
भीषण तप्त रवि किरणों को,
छुपा लिया निज तन पीछे ॥
तप्त और बेहाल धरा को,
नवजीवन का दान दिया है ।
निरीह निर्जल नयनों को,
जीवन का वरदान दिया है ॥
साकार सृष्टि सागर से पाकर,
हिमगिरि को भी मान दिया है ।
प्रतीक्षारत प्यासे कण्ठों को,
शीतलता ससम्मान दिया है ॥
प्रेरणास्पद औ रोचक कितना,
तेरे जन्म-बलिदान का किस्सा ।
’परहित हेतु समर्पित होना’,
तुझ से ही है जग का हिस्सा ॥


Wednesday, March 7, 2012

होली

आइये होलिका जलायें, प्रह्लाद बचायें ,

असत्य भार भस्मकर सत्य-ज्योति जलायें ।

मिटाकर आलस्य, जड़ता, क्लान्ति-श्रान्ति,

नव उमंग, नव-तरंग ले आगे कदम बढ़ायें ॥

सत्य का स्थापन हो, असत्य का समापन हो ।

मिलजुल रहें सब स्नेहमय अपनापन हो ॥

नवल का संधान हो, नूतन विहान हो ।

हर तान समवेत कर, बस फागुनी तान हो ॥

सप्तरंग वसुन्धरा, वसन्तमयी है धरा ।

तिक्तता त्याज्य हो, धैर्य धार्य मधुरा ॥

रंग-बिरंगी प्रकृति, मकरन्द मधुर महक रहा ।

कोयलिया कुहुँक रही, खगकुल चहँक रहा ॥

रंग-बिरंगा हृदय हो, रंग-बिरंगी भावनायें ।

जन-जन को होली की हार्दिक शुभकामनायें ॥