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सूर्योदय

Thursday, September 4, 2008

कीमत

किसी चीज़ की कीमत कीमत नही होती
कीमत तो उसकी है जिसकी कोई कीमत नही होती
इसलिये हमारी कीमतों को अपनी कीमतों से मत आँकों
क्योकि हमारी कीमतों की कोई कीमत नही होती
उनकी बुलन्दियों की कीमत भी मत आँकों
क्योंकि वो तुम्हारी बुलन्दियाँ नहीं होतीं
आकाशीय पक्षियों की कीमत नहीं आँकी जाती
क्योंकि वे वो पूँजी हैं जो ज़मा नही होती

1 comment:

मुकेश कुमार मिश्र said...

बहुत अच्छी कविता है ।
धन्यवाद